Showing posts with label Ias. Show all posts
Showing posts with label Ias. Show all posts

Thursday, 22 October 2015

यूपीएससी टॉपर गौरव अग्रवाल की success story & success tips

यूपीएससी टॉपर रहे राजस्थान के गौरव अग्रवाल का कहना है कि सफलता के लिए ज़रूरी है कि इंसान अपनी कमी को छिपाने के बजाए उसे स्वीकार करे और उसमें सुधार लाने की कोशिश करे।
गौरव अग्रवाल जयपुर का रहने वाला है। मेरे पिता श्री एसपी गुप्ता जयपुर डेयरी केंद्र में मैनेजर हैं और मेरी मां गृहिणी हैं। मेरी एक बड़ी बहन हैं, जिनकी शादी हो चुकी है और वो इस समय अमेरिका में हैं। मेरे जीजाजी माइक्रोसॉफ्ट में काम करते हैं।
मैंने अपनी शुरुआती पढ़ाई जयपुर के एडमंड्स स्कूल से की। उसके बाद मैंने आईआईटी कानपुर से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया। आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में पूरे भारत में मेरी 45वीं रैंक आई थी। आईआईटी के बाद मैंने आईआईएम लखनऊ से एमबीए किया। आईआईएम में मुझे गोल्ड मेडल मिला।
इसके बाद मैंने क़रीब चार साल तक हांग-कांग में सिटी ग्रुप में काम किया। मैं इनवेस्टमेंट बैंकिंग में काम करता था। मैंने वहां 2011 के अंत तक काम किया। उसके बाद वो जॉब छोड़कर आईएएस की तैयारी करने लगा। पिछले साल पहले प्रयास में मेरी 244 रैंक आई। इसके बाद मुझे राजस्थान कॉडर में आईपीएस मिला और फिर इस साल पहली रैंक आ गई।
 गौरव का मानना है कि अपनी कमजोरियों का सामना करके बड़ी से बड़ी कामयाबी हासिल की जा सकती है।
आप इतने प्रतिभावान छात्र रहे हैं। आपने किस तरह से पढ़ाई की और कितनी मेहनत की?
गौरव अग्रवाल: देखिए, मेहनत तो सभी करते हैं। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि आम तौर पर इस तरह की परीक्षाओं में हमें कभी भी दूसरों से प्रतिस्पर्धा नहीं करनी चाहिए। हमें बस अपने आप को और बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए। तो हर रोज़ अपने आप से प्रतिस्पर्धा कीजिए।
ये कि अगर आपको कभी भी अपनी किसी कमी के बारे में पता चलता है तो उसे छिपाने या उससे डरने के बजाए उनको स्वीकार कीजिए और उनमें सुधार लाने की कोशिश कीजिए। अपनी पूरी मेहनत कीजिए और फिर जो होना होगा, देखा जाएगा। आप इस सफलता के पीछे क्या वजह मानते हैं?
गौरव अग्रवाल: सफलता के पीछे मेहनत तो एक वजह होती ही है। इसके अलावा अपने घरवालों और दोस्तों का पूरा सहयोग था और फिर क़िस्मत होती है। भारतीय प्रशासनिक सेवा को काफी चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
माता-पिता से कितना बड़ा सहयोग मिला?
गौरव अग्रवाल: बचपन से लेकर आज तक उन्होंने ही प्रोत्साहित किया। पापा मेरी और मेरी बहन की पढ़ाई में काफ़ी रुचि लेते थे। आईएएस की पढ़ाई में भी पापा ने काफ़ी साथ दिया।
मेरे मौसा जी और मेरे फूफा जी ने भी मेरा मार्गदर्शन किया। सबके साथ और सबके आशीर्वाद से ही इस तरह की सफलता मिल पाती है। इतने साल तक आपने निवेश बैंकर तक काम किया। मेरा आकलन है कि आपको विदेश में अच्छा-ख़ासा वेतन मिल रहा होगा। : प्रशासनिक सेवा जैसे जॉब काफ़ी अलग होते हैं। इस तरह के जॉब आपको निजी क्षेत्र में नहीं मिल सकते हैं। इनमें आप सीधे जनता से रूबरू होते हैं। आपको लोगों के बीच में जाना होता है। लोगों की समस्याओं को हल करना होता है। इसलिए ये जॉब मुझे काफ़ी अपील करती है।
आप क्या प्रशासनिक बदलाव लाना चाहते हैं?
गौरव अग्रवाल: जी हां, ये तो समय ही बदलाव का है। तो बदलाव तो आएंगे ही। हम भी एक नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं। हमारे यहां प्रशासन से जुड़े कुछ मसले हैं। जैसे फ़ाइलें लटकी रहती हैं। कुछ काम नहीं होता। आमतौर पर प्रशासन की नागरिकों के प्रति सहानुभूति नहीं रहती। हमें इस माहौल को बदलना होगा।
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
Note - अगर आपके पास हिन्दी में अपना
खुद का लिखा हुआ कोई Motivational लेख या
सामान्य ज्ञान से संबंधित कोई साम्रगी या
प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित
कोई भी साम्रगी है जो आप
हमारी बेबसाइट पर पब्लिश कराना चाहते
है तो क्रपया
हमें rahulkrsr@gmail.com पर अपने
फोटो व नाम के साथ मेल करें ! पसंद आने पर उसे आपके
नाम के साथ पब्लिश किया जायेगा ! क्रपया कमेंट के माध्यम
से बताऐं के ये पोस्ट आपको कैसी
लगी आपके सुझावों का भी स्वागत
रहेगा Thanks !
  आपका दोस्त राहुल ।

Friday, 16 October 2015

कल तक सबको सलाम ठोकने वाला चौकीदार बन गया ‪कलेक्टर‬●

● कल तक सबको सलाम ठोकने वाला चौकीदार बन गया ‪कलेक्टर‬ ●
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■

भौतिक सुख-सुविधाओं के हम आदी हो चुके हैं. और इसी ने हमें आलसी बना दिया है. निजी कंपनी में नौकरी करने वाले लोग अक्सर यह कहते हुए पाए जाते हैं कि यार कंपनी बहुत काम लेती है. 9 घंटे की नौकरी…… 10 घंटे की नौकरी…. सारा समय ऑफिस में निकल जाता है……. ……ब्ला…ब्ला. पर इस खबर को पढ़ने के बाद शायद आप ये फिर कभी ना कह पाएंगे

14 वर्षों से सिक्युरिटी गार्ड की नौकरी कर रहे एक युवक ने अपने दूसरे प्रयास में भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा पास कर ली. युवक शादीशुदा और बाल-बच्चेदार है. उड़ीसा के रहने वाले इस युवक का नाम जोति रंजन बागरती है. बागरती ने उस परीक्षा को पास कर दिखाया है जिसे पास करने के लिए विद्यार्थी दिल्ली, मुंबई, पटना जैसे नगरों में अपनी जिंदगी के 5 से 10 वर्ष झोंक देते हैं.

दस वर्ष पहले अपने पहले प्रयास में असफल होने के बाद वो पिछले दो वर्षों से इस परीक्षा की तैयारी कर रहा था. अभी मदुरै में उसका प्रशिक्षण चल रहा है.
भारत में कई ऐसे व्यक्ति हुए हैं जिन्होंने अभावों से जूझते हुए असाधारण सफलता हासिल की है. इससे पहले भी अभावों में जूझते हुए रिक्शा चालक के बेटे गोविंद जायसवाल ने भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा पास की थी.

जम्मू-कश्मीर के सोपोर क्षेत्र के एक दुकानदार के बेटे बशीर अहमद भट्ट भी सिविल सेवा परीक्षा पास कर सुर्शियों में आए थे. इन गुदड़ी के लालों की जीवटता से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं में उर्जा और उमंग का संचार होता है. इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाता है जिससे कई लोगों को प्रेरणा मिलती है।
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■